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देश भर में धूमधाम से मनाया जा रहा है दिवाली, 17 साल बाद आया सर्वार्थ सिद्धि योग, बेहद लाभकारी

Published on : Nov 14, 2020, 13:28 PM
By : Sidharth kumar
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HIGHLIGHTS

  • शाम 5 बजकर 30 मिनट से शाम के 7 बजकर 07 मिनट तक पूजा करना बेहद शुभ
  • बृहस्पति ग्रह अपनी स्वराशि धनु और शनि अपनी स्वराशि मकर में रहेगा

दीपों के पर्व दीपावली आज धूमधाम से मनाया जा रहा है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह पर्व इस बार ग्रहों के विशेष संयोग से बेहद खास है। जानकारों के मुताबिक दिवाली पर 17 साल बाद आया सर्वार्थ सिद्धि योग बेहद लाभकारी सिद्ध होगा।

आज की दिवाली पर धन और ज्ञान का कारक बृहस्पति ग्रह अपनी स्वराशि धनु और शनि अपनी स्वराशि मकर में रहेगा। जबकि शुक्र ग्रह कन्या राशि में रहेगा। ज्योतिषविदों का कहना है कि दिवाली पर ऐसा संयोग 499 साल बाद बन रहा है। इससे पहले ग्रहों की ऐसी स्थिति 1521 में देखी गई थी।

दिवाली पर शाम को 5 बजकर 30 मिनट से शाम के 7 बजकर 07 मिनट तक प्रदोष काल रहेगा। इस काल में पूजा करना बेहद शुभ माना गया है। इसके बाद निशीथ काल पूजा मुहूर्त रात्रि 08 बजे से रात 10.50 बजे तक रहेगा। 10 बजकर 33 मिनट से रात 12 बजकर 11 मिनट तक अमृत मुहूर्त रहेगा, जिसमें आप कनक धारा स्तोत्र का पाठ, श्री सूक्त का पाठ कर सकते हैं।

दिवाली पर शाम 05 बजकर 38 से 07 बजकर 16 तक लाभ मुहूर्त लगेगा। इस दौरान दान, धर्म आदि के काम बेहद शुभ माने जाते हैं। इस दौरान किए गए कुशल कार्यों का लाभ व्यक्ति को लंब समय तक मिलता है। इससे पहले सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहने वाला है।

स्कंद पुराण के अनुसार कार्तिक अमावस्या के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर सभी देवी देवताओं की पूजा करनी चाहिए. शाम के समय पूजा घर में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की नई मूर्तियों को एक चौकी पर स्वस्तिक बनाकर स्थापित करना चाहिए. पूजा के स्थान पर रुपया, सोना या चांदी का सिक्का जरूर रखें. साथ हीं मूर्तियों के सामने एक जल से भरा हुआ कलश रखना चाहिए. इसके बाद मूर्तियों के सामने बैठकर हाथ में जल लेकर शुद्धि मंत्र का उच्चारण करते हुए उसे मूर्ति, परिवार के सदस्यों और घर में छिड़कना चाहिए. अब फल, फूल, मिठाई, दूर्वा, चंदन, घी, मेवे, खील, बताशे, चौकी, कलश, फूलों की माला आदि सामग्रियों का प्रयोग करते हुए पूरे विधि-विधान से लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा करनी चाहिए.

इनके साथ-साथ देवी सरस्वती, भगवान विष्णु, मां काली और कुबेर की भी विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए. पूजा करते समय 11 छोटे दीप और एक बड़ा दीप जलाना चाहिए. पूजा के बाद दीपक घर के बाहर आंगन में लगा दें. आज के दिन इस बात का विशेष ध्यान रखा जाय कि घर के किसी भी कोने में अंधकार न रहे. 

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