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UP चुनाव: बिहार की क्षेत्रीय पार्टी भी चुनावी मैदान में, भाजपा की बढ़ी मुश्किलें

Published on : Jan 11, 2022, 20:30 PM
By : Bureau
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HIGHLIGHTS

  • 165 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार है मुकेश साहनी
  • जदयू भी यूपी में लड़ सकती है चुनाव

लखनऊ: देश में सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी हैं। प्रदेश में सात चरणों में चुनाव होंगे।  एक तरफ जहाँ चुनाव की घोषणा होने के बाद आज भाजपा को बड़ा झटका लगा और एक मंत्री समेत समेत कई विधायकों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया हैं वहीं बिहार के कई क्षेत्रीय पार्टी ने यूपी में चुनाव लड़ने का फैसला किया है जो कही ना कही भाजपा के लिए मुसीबत बन सकते हैं। मिली जानकारी के मुताबिक बिहार की चार क्षेत्रीय दलों ने यूपी में चुनाव लड़ने का फैसला किया है, जिनमे से दो बिहार में एनडीए का हिस्सा हैं। 

जदयू भी यूपी में लड़ सकती है चुनाव 

जनता दल (यू) यूपी चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है और उसके नेताओं का दावा है कि वे सीट बंटवारे के लिए भाजपा के साथ बातचीत कर रहे हैं। हालांकि भाजपा ने उत्तर प्रदेश में जद (यू) के साथ संभावित सीट बंटवारे पर एक शब्द भी नहीं कहा है। भाजपा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक पार्टी वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि उनके पास पहले से ही सहयोगी है जैसे अपना दल और निषाद पार्टी और इन्ही दोनों दलों के साथ सीट बंटवारे को अंतिम रूप दिया जा रहा है। 

165 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार है मुकेश साहनी 

बिहार के मंत्री मुकेश साहनी, जो विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रमुख हैं, उत्तर प्रदेश की 165 निषाद बहुल सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। वीआईपी बीजेपी के साथ बातचीत नहीं कर रही है, जो पहले से ही अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी निषाद पार्टी के साथ गठबंधन कर चुकी है। पार्टी नेताओं का कहना है कि वे अपने दम पर चुनाव लड़ेंगे और ज्यादा से ज्यादा संख्या में उम्मीदवार उतारने की कोशिश करेंगे। इसी बीच यह भी खबर सामने आ रही है कि लोक जन शक्ति पार्टी रामविलास भी यूपी में चुनाव लड़ने को पूरी तैयार है और वह प्रदेश के सभी सीटों पर अपना उम्मीदवार उत्तारने की प्रयास में लगी हुई हैं।  सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अगले एक से दो दिनों में प्रत्याशियों के नामों की भी घोषणा हो सकती हैं।  

गौरतलब हो कि इन पार्टियों में अधिकांश के पास राज्य में संगठनात्मक आधार नहीं है। ये जीतेंगी या नहीं, लेकिन ये प्रमुख दलों के वोटों में जरूर काट सकती हैं या उन्हें परेशान कर सकती हैं खासकर यूपी बिहार की सीमा से लगते इलाकों में। उत्तर प्रदेश में बिहार के राजनीतिक दलों का भले ही जनाधार ना हो, लेकिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी दल यूपी में बीजेपी के सहारे राजनीतिक वजूद कायम करना चाहते हैं और अगर अगर ऐसा हुआ तो सबसे ज्यादा नुक्सान सत्ताधारी दल भाजपा को ही होगा।  

 

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